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वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर कॉंग्रेस कैसे पहुंचेगी कुर्सी तक ,प्रत्यासियों की घोषणा होते ही बगावत चरम पर

हल्द्वानी

कांग्रेस में उम्मीदवारों की लिस्ट जैसे जैसे जारी हो रही है वैसे वैसे बगावती सुर भी लगातार उठने लगे हैं ,ऐसे में कांग्रेस के लिए सत्ता की कुर्सी तक पहुंच पाना आसान काम नहीं होगा ,

तमाम सर्वे इस बार विधानसभा की लड़ाई को कांटे की टक्कर मान रहे हैं लड़ाई फिफ्टी फिफ्टी (50-50) रहने वाली है , लेकिन जिस तरह से टिकट वितरण के बाद दोनों ही पार्टियों में बगावती सुर उठे हैं उससे यह लगता है कि दोनों ही पार्टियों के पहुंच वाले नेता अपने को आगे करने की होड़ में एक-दूसरे को निपटाने में लगे हुए हैं , कांग्रेस के अंदर उपजे असंतोष की यदि बात करें तो हरीश रावत भले ही पूर्व में चुनाव न लड़ने की इच्छा जता रहे हो लेकिन आखिरी समय पर रामनगर से टिकट हासिल करने में कामयाब रहे साथ ही उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा के चलते कई वरिष्ठ और ऐसे साथियों को भी निपटा दिया जिन्होंने उनका हर कदम साथ दिया ,यह हम नहीं कांग्रेस के ही वरिष्ठ लोगों का कहना है ।

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बात शुरू करें गंगोलीहाट सीट की तो वहां से नारायण राम आर्य ने हरीश रावत के खिलाफ बगावती सुर तेज कर दिए हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है ,नारायण राम कभी हरीश रावत के करीबी माने जाते थे ,उन्होंने एक वीडियो जारी कर हरीश रावत पर कई गम्भीर आरोप भी लगाए हैं ,उसके बाद लालकुआं विधानसभा सीट की बात करें तो 2012 में निर्दलीय विधायक के तौर पर जीते हरिश चंद्र दुर्गापाल ने कांग्रेस की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी और समय-समय पर उन्होंने कांग्रेस की डगमगाती सरकार को बचा कर रखा ,वह भी हरीश रावत के खासे करीबी माने जाते थे और इस बार उन्होंने आखरी बार टिकट की उम्मीद लगा रखी थी , लेकिन उनको भी तगड़ा झटका लगा है और वह भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का मन बना रहे हैं ,हरीश चंद्र दुर्गापाल लालकुआं सीट से कॉंग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेता हैं , बात करते हैं सबसे हॉट सीट रामनगर विधानसभा सीट की जहां से पूर्व सीएम हरीश रावत के सबसे करीबी या यूं कहें कि जब हरीश रावत मुख्यमंत्री बने तो बैक डोर से सरकार चलाने का सारा जिम्मा रंजीत रावत के हाथों में ही था और वह मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे करीबी माने जाते थे लेकिन धीरे-धीरे दोनों में दूरियां बढ़ती गई फिलहाल रंजीत रावत प्रीतम सिंह के करीबी माने जा रहे हैं , रंजीत रावत पिछले 5 सालों से रामनगर विधानसभा में सक्रिय थे और पूरी तरह से विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे उनको भी तगड़ा झटका तब लगा जब पहले चुनाव ना लड़ने मुख्यमंत्री ना बनने की मंशा जता रहे हरीश रावत खुद रामनगर सीट पर चुनाव लड़ने पहुंच गए , यही हाल कालाढूंगी विधानसभा का भी है जहां पर पिछले लंबे समय से तैयारी कर रहे महेश शर्मा और भोला दत्त भट को भी कॉंग्रेस पार्टी ने करारा झटका दिया है ।

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अब ऐसे में देखना यह होगा कि कांग्रेस किस तरह से बागियों को मनाने में कामयाब होती है ,
यदि कांग्रेस अपने बागियों को संभालने में कामयाब रही तो विधानसभा तक का सफर उसके लिए आसान हो सकता है लेकिन अभी यह राह कांटों भरी दिखती है ।

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