हल्द्वानी

हरेला पर्व पर जहां पूरे उत्तराखंड में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं हल्द्वानी के तीनपानी चौराहा से बाल संसार स्कूल होते हुए सोनकर फार्म जाने वाली जर्जर सड़क पर बच्चों को मजबूरन सड़क के गहरे गड्ढों में प्रतीकात्मक पौधरोपण करना पड़ा। यह पौधरोपण उत्सव नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ एक अनोखा विरोध था।
बच्चों ने हाथों में पौधे लेकर सड़क के गड्ढों में रोपण किया और संदेश दिया कि यदि सड़क की मरम्मत नहीं हो सकती, तो कम से कम इन गड्ढों को ही हराभरा बना दिया जाए। उनका कहना था कि हरेला केवल पेड़ लगाने का पर्व नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर जीवन का भी संकल्प है। जब स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज जान जोखिम में डालकर इस सड़क से गुजरना पड़े, तो विकास के दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

स्थानीय पार्षद, विधायक, सांसद से बार बार शिकायत कर थक चुके लोगों का आरोप है कि इस सड़क की बदहाली की शिकायत लगभग 9 महीने पहले मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन आज तक न तो PWD ने सुध ली और न ही जिला प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की।
(CM पोर्टल पर शिकायत के प्रूफ भी देखिए👇👇👇👇)

(शिकायत के इन दस्तावेजों को देखकर लगता है कि PWD विभाग सरकार के कामों पर पलीता लगाने का काम कर रहा है या उन्हें इस शिकायत से कोई फर्क नही पड़ता)

शिकायतें कागजों तक सीमित रह गईं, जबकि सड़क की हालत लगातार बदतर होती चली गई।
यह मार्ग नगर निगम के वार्ड-58 सहित तीन गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और स्थानीय नागरिक इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रहे हैं और कई लोग अब तक गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि आखिर PWD और जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहे हैं? जब शिकायतें पहले ही दर्ज हो चुकी हैं और सड़क की बदहाली सबके सामने है, तो मरम्मत कार्य शुरू करने में इतनी देरी किस वजह से हो रही है?
हरेला के अवसर पर बच्चों का यह प्रतीकात्मक विरोध प्रशासन के लिए एक आईना है। अब देखना होगा कि PWD और जिला प्रशासन इस संदेश को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह सड़क किसी बड़े हादसे के बाद ही अधिकारियों की नींद तोड़ेगी।