शराब पैसे और मीडिया मैनेजमेंट के जरिये चुनाव जीतने की जुगत में नेता जी , स्थानीय मुद्दे चुनावों से गायब , पर्सनल छींटाकसी बनी चुनावी मुद्दा ।

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नैनीताल

विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार जोरों पर है और सभी दल चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं ,पैसे और शराब के बल पर कोई चुनाव जीतने की जुगत में है तो कोई मीडिया मैनेजमेंट के सहारे अपने आप को चमकाने की कोशिश कर रहा है ,लेकिन ये सब तभी अच्छा लगता जब विधानसभा क्षेत्रों की बुनियादी दिक्कतों की बात की जाती , नैनीताल जिले की विधानसभाओं की बात करें तो सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी एक दूसरे पर छींटाकशी और आरोप लगाकर चुनाव में जीत दर्ज करना चाहते हैं ,  जबकि विधानसभा के अंदर जो जनता के मुद्दे हैं वह पूरी तरह से गायब है , हर प्रत्यासी जीत कर सत्ता के सिंहासन तक तो पहुंचना चाहता है लेकिन पर्सनल छींटाकशी के जरिए ।

स्थानीय मुद्दों की क्यों कोई बात नहीं कर रहा ?

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क्या विधानसभा चुनाव पर्सनल लड़ाई पर जीते या हारे जाएंगे ?

यदि राजनीतिक पार्टियां इस तरह से चुनाव जीतने की जुगत में लगी है तो इस बार वोटर अपनी वोट की चोट से ऐसे भ्रष्ट नेताओं को आईना दिखाने का काम करेगा , हर विधानसभा में कुछ न कुछ ऐसे ज्वलंत मुद्दे जरूर हैं जिनको उत्तराखंड राज्य बनने के 21 सालों के बाद भी सुलझाया नहीं जा सका है लेकिन हमारे नेताओं की कारगुजारी देखिए वह जनता को महा बेवकूफ समझते हैं और हर चुनाव में झूठे वादे कर चुनाव जीतकर करोड़पति बन जाते हैं ,और जनता पर लगाया जाता है टैक्स , महंगाई की मार से जनता त्रस्त है कोरोना महामारी के बाद कई घर ऐसे हैं जहां दाल रोटी के लाले पड़े हैं लेकिन हमारे भ्रष्ट नेता है कि वह चुनाव में पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं आखिर यह पैसा आ कहाँ से रहा है ,  कहीं न कहीं यह जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है अब आगामी चुनाव में जनता को यह तय करना है कि वह किसी भी उम्मीदवार को मुद्दों के आधार पर वोट देगा या उसकी पर्सनल छवि के आधार पर और वोटर को यह भी देखना जरूरी होगा कि यह नेता कितना विश्वसनीय है । और जनता के मुद्दों को सुलझाने में कितना सक्षम है । यदि इस तरह से जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे तो लोगों की दुश्वारियां कम हो सकती हैं , लेकिन यदि भ्रष्ट लोगों को हम सत्ता के सिंहासन पर पहुंचायेगे तो कहीं ना कहीं इसका खामियाजा जनता को ही भरना पड़ेगा ।

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