कुमाऊँ

(बनभूलपुरा हिंसा मामला) एक्शन मोड में एसएसपी नैनीताल, बनभूलपुरा हिंसा मामले की जांच दोबारा करेगी पुलिस, फिर खंगाली जाएगी दंगे की एक एक परत।

हल्द्वानी

 

हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा हिंसा मामले में आरोपी जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी है। साथ ही राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर जेल में सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बनभूलपुरा कांड की जांच दोबारा तेज गति से की जाए और हर पहलू की गहराई से पड़ताल हो।
एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ हल्द्वानी अमित सैनी, कोतवाल हल्द्वानी और बनभूलपुरा थाना पुलिस संयुक्त रूप से मामले की विस्तृत जांच करेंगे। पुलिस अब सर्विलेंस, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दंगे और उपद्रव में शामिल लोगों की दोबारा पहचान करेगी।
पुलिस ने साफ कर दिया है कि हिंसा में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी चिन्हित उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि 8 फरवरी को बनभूलपुरा क्षेत्र में हुई हिंसा में नगर निगम और पुलिस के कई कर्मचारी घायल हुए थे। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस की पिस्टल छीनने और सरकारी वाहन को आग के हवाले करने जैसी गंभीर घटनाओं को भी अंजाम दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पुलिस की सख्ती के बाद इस मामले में कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

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