हरिद्वार

सत्ता का रौब या कानून की धज्जियां?
राजाजी टाइगर रिजर्व… जहां आम आदमी को घुसने से पहले दस बार सोचना पड़ता है, वहां मंत्री के बेटे की “VIP शादी” की तैयारी खुलेआम चल रही थी। सवाल उठना लाज़मी है—क्या कानून सिर्फ जनता के लिए है और सत्ता के लिए छूट?
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी सुरेश्वरी मंदिर परिसर में तय हुई—वो भी टाइगर रिजर्व के भीतर। बिना अनुमति टेंट, सजावट और आयोजन की पूरी तैयारी… यानी जंगल के बीच सत्ता का जलवा!
मामला जैसे ही सामने आया— वन विभाग ने एक्शन लिया, टेंट उखाड़े गए, और मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज।
टाइगर रिजर्व प्रशासन ने साफ कर दिया— आरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह का आयोजन गैरकानूनी है, चाहे कोई भी हो।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है— क्या एक कैबिनेट मंत्री को कानून का बेसिक ज्ञान भी नहीं? या फिर ये मान लिया गया था कि “हम हैं, तो सब मुमकिन है”?
मंत्री खजान दास की सफाई— “हमें परमिशन की जानकारी नहीं थी, आस्था के चलते इच्छा थी…”
लेकिन जनता पूछ रही है— जब आम आदमी एक पेड़ काटने से पहले परमिशन लेता है,
तो मंत्री जी शादी जैसे बड़े आयोजन के लिए नियम भूल गए?
पर्यावरण प्रेमियों का गुस्सा भी जायज़ है— ये वही इलाका है जहां जंगली जानवरों का घर है। वहां शोर-शराबा, भीड़ और लाइटिंग… क्या ये जंगल के नियमों के साथ खिलवाड़ नहीं?
धारदार पंचलाइन: “कुर्सी मिलते ही कानून छोटा पड़ जाए… तो समझिए लोकतंत्र नहीं, VIP तंत्र चल रहा है।