कुमाऊँ

देवभूमि में अनोखा मंजर, एक मंडप में पांच भाइयों की शादी, ‘जोजोड़’ की अनोखी मिसाल

जौनसार/चकराता

 


उत्तराखंड की वादियों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने परंपरा, संस्कृति और संयुक्त परिवार की ताकत को एक साथ जीवंत कर दिया। चकराता के खारसी गांव में जौनसारी समाज की सदियों पुरानी ‘जोजोड़’ परंपरा के तहत एक ही परिवार के पांच भाइयों की शादी एक ही मंडप में धूमधाम से संपन्न हुई — और सबसे खास बात, दुल्हनें खुद बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचीं।
ढोल-दमाऊं की गूंज, लोकगीतों की मिठास और पारंपरिक वेशभूषा में सजा पूरा गांव किसी उत्सव से कम नहीं दिखा। हर ओर खुशियों की लहर थी, मानो पूरा क्षेत्र इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने उमड़ पड़ा हो।

इन जोड़ों ने एक साथ लिए सात फेरे:
नरेंद्र–अन्नू | प्रदीप–निक्की | प्रीतम–पुनीता | अमित–निर्मला | राहुल–आंचल।

स्थानीय भाषा में इन दुल्हनों को ‘जोजोल्टी’ कहा जाता है, जो इस परंपरा की खास पहचान है। पांचों दुल्हनों के एक साथ ससुराल पहुंचने का नजारा इतना खास था कि गांव में उन्हें देखने वालों का तांता लग गया।
इस भव्य आयोजन के सूत्रधार परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि संयुक्त परिवार, सामाजिक एकजुटता और लोकसंस्कृति का जीवंत उत्सव बन गया।
अब इसी परिवार में एक और खुशी आने वाली है, क्योंकि बेटी प्रियंका की शादी की तैयारियां भी जोरों पर हैं।
यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि उत्तराखंड की परंपराएं सिर्फ जिंदा ही नहीं, बल्कि गर्व के साथ आगे बढ़ रही हैं।

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