कुमाऊँ

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण को बिना नोटिस दिए ध्वस्त किये जाने पर उठाये सवाल

नैनीताल

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अतिक्रमण को बिना नोटिस दिए ध्वस्त किए जाने का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को पेश होने के निर्देश दिये हैं। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य में वन भूमि, राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गो और राजस्व भूमि पर अवैध अतिक्रमण से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। खंडपीठ ने इससे पहले मामले में राज्य सरकार को जिला स्तरीय समितियां गठित करने तथा चिन्हित अतिक्रमणों पर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। अदालत को सोमवार को सूचित किया गया कि नोटिस जारी किए बिना और सुनवाई का मौका दिए बिना अतिक्रमणों को ध्वस्त किया जा रहा है जो उच्चतम न्यायालय द्वारा इस संबंध में जारी निर्देशों का उल्लंघन है। अदालत ने इसका गंभीर संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पेश होने और जनहित के इस दावे का जवाब देने का निर्देश दिया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। मामले में सुनवाई की अगली तारीख एक सप्ताह बाद की तय की गई है। इससे पहले अदालत ने नैनीताल के पदमपुरी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन तथा सड़क के किनारे के क्षेत्रों पर अवैध अतिक्रमण किए जाने का संज्ञान लिया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने राज्यभर में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, वन भूमि और राजस्व भूमि से अतिक्रमण हटाने तथा अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश सभी जिलाधिकारियों और प्रभागीय वन अधिकारियों को दिया था।

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